Monday, February 24, 2020

नौगांवा नगर पंचायत सो रही है आम जनता परेशान है। AMH

केंद्र सरकार एवं राज्य सरकार समय-समय पर सड़कों को दुरुस्त करने के लिए बजट पास करती है तो वहीं पर नौगांवा सादात के एक मोहल्ला गुला तालाब पर सड़क का यह हाल है कि वहां पर पानी भरा हुआ है

नगर वासियों का कहना है कि नगर पंचायत में कई बार शिकायत करने के बाद भी इस समस्या का हल नहीं हुआ है

नगर वासियों का कहना है कि इस पानी भरे होने की वजह से हमें बहुत सारी समस्याओं का सामना करना पड़ता है।

नगरवासी इस सड़क के फोटो को सोशल मीडिया पर वायरल कर रहे हैं ताकि उच्च अधिकारी इस पर उचित कार्यवाही कर सकें।


एक सामाजिक संगठन मिजाने हक सोसाइटी  का कहना है कि   यह नौगांवा सादात  के एक मोहल्ले की तस्वीर है जहां पर नौगांवा सादात के विकास और स्वच्छ भारत अभियान की सच्चाई और नगर पंचायत की सोती हुई नीद  को जगाने के लिए यह फोटो काफी है।

मिजाने हक वेलफेयर सोसाइटी ने कहा कि हम नगर पंचायत नौगांवा सादात की निंदा करते है।

मिजाने हक वेलफेयर सोसाइटी इन फोटो के साथ एक शिकायत पत्र जिला अधिकारी को भेजने वाली है ताकि जिन लोगों की यह लापरवाही है उन पर कार्यवाही की जा सके।
नगर पंचायत नौगांवा सादात को शर्म आनी चाहिए सभासदों को शर्म आनी चाहिए के नगर में ऐसी स्थिति है। नगर पंचायत की जवाबदेही बनती है कि इसका जिम्मेदार कौन है? क्या सभासद जिम्मेदार हैं चेयरमैन जिम्मेदार है या इसका ठेकेदार जिसने सड़क बनाने का ठेका लिया था? Nowgawn Sadat

Friday, December 6, 2019

1240 रुपए हर कर्मचारी से हर महीने चेयरमैन लेकर खाता है। नगर पंचायत नौगांवा सादात।

1240 रुपए हर कर्मचारी से हर महीने चेयरमैन लेकर
खाता  है। नगर पंचायत नौगांवा सादात।

स्वच्छ भारत अभियान की धज्जियां उड़ाई जा रही है।
सफाई कर्मचारी हड़ताल पर।सफाई कर्मचारियों का वेतन 9240 पर दिए जाते हैं केवल ₹8000 नगर पंचायत नौगांवा सादात। 
plese watch vedio
1240 रुपए हर कर्मचारी से हर महीने चेयरमैन लेकर खाता है। नगर पंचायत नौगांवा सादात।

Thursday, April 19, 2018

आवश्यक घोषणा - “मारेफ़त” हज़रत इमाम महदी अलैहिस्सलाम कि आल इण्डिया लिखित प्रतियोगिता

आवश्यक घोषणा
आल इण्डिया लिखित प्रतियोगिता मारेफ़त हज़रत इमाम महदी   अलैहिस्सलाम
हज़रत इमाम महदी (अलैहिस्सलाम) के योमे मिलादत के मोके पर हज़रत इमाम महदी (अलैहिस्सलाम) की हयाते मुक़दस से मुतालिक मालूमात पर प्रशन पत्र के माध्यम से लिखित प्रतियोगिता (भाषा - हिंदी/ उर्दू) का आयोजन किया गया है
प्रतियोगिता में चुने हुए व्यक्तियों को प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया जाएगा
प्रश्न पत्र हासिल करने के लिए संपर्क करें+91 9548347297Email Id: office.mizanehaq@gmail.com 
या प्रश्न पत्र हासिल करने के लिए यहाँ क्लिक करें
उत्तर कापी जमा करने की तारीख 15 शाबान 1439 है
आयोजक मिज़ाने हक वेलफेयर सोसाइटी नौगावा सादात जिला अमरोहा, भारत
ضروری اعلان
ہندوستان میں حضرت  امام زمانہ  عجل اللہ فرجہ الشریف کی پر نور ولادت کے موقح پر "کل ہند تحریری مقابلہ" (اردو /ہندیعنوان "معرفت حضرت  امام عصر عجل اللہ تعا لی"آپکی حیات مقدس سے متعلق معلومات پر سوال نامہ کے ذریعہ تحریری مقابلہ رکھا گیا ہے
جوابات کی کاپی  جمع کرنے کی آخری تاریخ 15 شعبان المعظم 1439ھ  ہے
مقابلہ میں منتخب اشخاص کو تو سیفی سند سے سر فراز کیا جائے گا
سوال نامہ حاصل کرنے کے لئے رابطہ کریں +91 9548347297
                                                                  Email Id: office.mizanehaq@gmail.com 
زیرانتظاممیزان حق فلاح و بہبود سوسائٹی



Thursday, March 8, 2018

श्रीलंका में बौद्धों का मुसलमानों पर हमला

 श्रीलंका में बौद्धों की भीड़ ने अल्पसंख्यक मुसलमानों की मस्जिदों, घरों और दुकानों पर मंगलवार रात हमले किए। देश में शांति कायम करने के लिए लगाए गए आपातकाल के बावजूद ये हमले हुए। ताजा ¨हसा के बाद दंगा प्रभावित कैंडी जिले में बुधवार को फिर अनिश्चितकालीन कफ्यरू लगा दिया गया और इंटरनेट सेवा बंद कर दी गई। 1पुलिस ने बताया कि कैंडी में मंगलवार से बुधवार सुबह तक कफ्यरू लगाया गया था। लेकिन मंगलवार रात ¨हसा की कई घटनाएं हुईं। इनमें तीन पुलिस अधिकारी घायल हो गए। घायल नागरिकों की संख्या का पता नहीं चल पाया। पुलिस ने दंगाइयों से निपटने के लिए आंसू गैस के गोले दागे। इस दौरान सात लोगों को गिरफ्तार किया गया। कैंडी में मुसलमानों के साथ झगड़े में बौद्ध युवक की मौत के बाद रविवार रात से ¨हसा शुरू हुई और श्रीलंका के कई हिस्सों में फैल गई। 1कोलंबो, रायटर/प्रेट्र : श्रीलंका में बौद्धों की भीड़ ने अल्पसंख्यक मुसलमानों की मस्जिदों, घरों और दुकानों पर मंगलवार रात हमले किए। देश में शांति कायम करने के लिए लगाए गए आपातकाल के बावजूद ये हमले हुए। ताजा ¨हसा के बाद दंगा प्रभावित कैंडी जिले में बुधवार को फिर अनिश्चितकालीन कफ्यरू लगा दिया गया और इंटरनेट सेवा बंद कर दी गई। 1पुलिस ने बताया कि कैंडी में मंगलवार से बुधवार सुबह तक कफ्यरू लगाया गया था। लेकिन मंगलवार रात ¨हसा की कई घटनाएं हुईं। इनमें तीन पुलिस अधिकारी घायल हो गए। घायल नागरिकों की संख्या का पता नहीं चल पाया। पुलिस ने दंगाइयों से निपटने के लिए आंसू गैस के गोले दागे। इस दौरान सात लोगों को गिरफ्तार किया गया। कैंडी में मुसलमानों के साथ झगड़े में बौद्ध युवक की मौत के बाद रविवार रात से ¨हसा शुरू हुई और श्रीलंका के कई हिस्सों में फैल गई। 1सेंट्रल श्रीलंका के अंबेतेना इलाके में सांप्रदायिक हिंसा के दौरान की गई आगजनी के बाद आग पर काबू करती पुलिस की टुकड़ी।

Wednesday, March 7, 2018

बजरंग दल के आतंकियों ने मुस्लिम माँ और बेटे पर जानलेवा हमला किया

गुजरात: जहाँ हर तरफ गुजरात की तारीफें की जाती है जहाँ बेटीओं और महिलाओं को बढ़ावा देने बात कहीं जाती है लेकिन आय दिन पीएम मोदी के गुजरात में कुछ ऐसा होता है जिससे पूरा देश हैरान रह जाता है. इन दिनों फिर से गुजरात में एक मामला पेश आया है जिसने हर किसी को हैरान कर दिया है और यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि आखिर मुसलमानों को सज़ा किस बात की दी जा रही है।
गुजरात के छत्राल गांव में 4 मार्च  सुबह 5.30 बजे 32 वर्षीय सयैद फरनाज़ और उनकी माँ रोशन बानो खेत मे जा रहे थे तभी अचानक बजरंग दल के गुंडों ने माँ और बेटे पर घातक हमला किया. आपको बता दें कि बजरंग दल के भगोड़े अमित पटेल, अंकित नाडिया, बदो मुखी, धर्मा पटेल और अन्य 3 लोगो ने मिलकर खेत मे जाने वाले रास्ते में शमशान तालाब के पास इस वारदात को अंजाम दिया।
हमलावरों ने फरनाज़ सैयद  के सिर पर इतनी तेज़ वार किया जिसकी वजह से उन्हें गंभीर चोट आई है. बजरंग दल के गुंडे इतने पर भी नहीं रुके इसके बाद उनके दोनों हाथों पर वार करके हाथों को तोड़ डाला और दरिंदों ने फरनाज़ की माँ रोशन बानो के हाथ का पंजा ही काट डाला.
वारदात के बाद दोनों को अहमदाबाद के वी एस अस्पताल में लाया गया है, जहाँ पर इनका इलाज हो रहा है. वहीँ माँ-बेटे को अल्पसंख्यक अधिकार मंच के साथी शरीफ मलिक भी सुबह पीड़ितों को सहानभूति देने अस्पताल पहुंचे।
गुजरातः  मुस्लिम माँ और बेटे पर जानलेवा हमला।

जनाबे फ़ातिमा ज़हरा स. विलायत के आसमान का एक तारा।

क़ुरआने मजीद सूरए नहल की आयत 16 में फ़रमाता है:
 ’’وَ بِالنَّجمِ ھُم یَھتَدونَ‘‘
बुद्धिमान वह हैं जो आसमान के तारों की सहायता से अपने रास्ते ढ़ूढ़ँते हैं और मंज़िल तक पहुँच जाते हैं। यह तारा जो आसमान में चमकता है, यह क्या होता है? क्या यह इतना ही छोटा सा एक दिया होता है जो टिमटमाता रहता है? जी नहीं! तारे की ख़ुद अपनी एक दुनिया है। कभी कभी यह पूरी एक गिलैक्सी होती है, कभी कभी एक तारा एक गिलैक्सी से बड़ा होता है लेकिन हमें छोटा सा दिखाई देता है। हम तारे की हल्की सी चमक देखते हैं लेकिन वह उससे कई करोड़ गुना बड़ा होता है जितना हमें नज़र आता है। जनाबे फ़ातिमा ज़हरा स. भी विलायत के आसमान का एक तारा हैं।
हमें उनकी महानता और श्रेष्ठता के बारे में बहुत कम मालूम है वरना सच यह है कि हम उनकी श्रेष्ठता के बारे में सोच भी नहीं सकते। एक हदीस में मिलता है कि जनाबे फ़ातिमा ज़हरा स. इतनी ज़्यादा नूरानी हैं कि आपकी चमक से आसमान के फ़रिश्तों की आँखें चौंधिया जाती हैं।
 ’’زہرا نورھا للملائکۃ السماء‘‘(امالی شیخ صدوق،مجلس ۲۴،ص۹۹)۔
यह तारा आसमान वालों के लिये चमकता है। यह तारा हमारे लिये हिदायत का तारा है। हमनें हिदायत के इस तारे से क्या पाया है? हमारे लिये ज़रूरी है कि इस चमकते तारे की रौशनी में ख़ुदा और ख़ुदा के रास्ते की खोज करें। वह रास्ता जिसे सीधा रास्ता कहते हैं, जिस रास्ते पर ख़ुद बीबी ज़हरा स. चली हैं। आपका जन्म भी एक ख़ास चीज़ से हुआ है। ख़ुदा यह बात जानता था कि यह महान औरत दुनिया में हर एम्तेहान और परीक्षा में सफल होगी इसलिये इसके जन्म का इंतेज़ाम भी ख़ास तरीक़े से किया।
इमामे जाफ़र सादिक़ अ. आपकी एक ज़ियारत में फ़रमाते हैं:
 :’’امتحنک اللہ الذی خلقک قبل ان یخلقک فوجدک لما امتخنک صابرہ ‘‘
ख़ुदा नें आपको पैदा करने से पहले आपका इम्तेहान लिया जिसमें आप सफल हुईं और अल्लाह की कसौटी पर खरी उतरीं। इसी लिये ख़ुदा नें उन्हें हमारे लिये हिदायत का एक आईडियल बनाया। इसलिये कि उनकी ज़िन्दगी का एक एक मिनट और एक एक क़दम अल्लाह के लिये था।
हमारी किताबों में यह हदीस है कि एक दिन रसूले ख़ुदा स. नें जनाबे फ़ातिमा स. से फ़रमाया:
 ’’یا فاطمہ اننی لم اغنی عنک من اللہ شیأ ‘‘
ऐ मेरी प्यारी बेटी फ़ातिमा! ख़ुदा के यहाँ मैं तुम्हे किसी चीज़ से रोक नहीं सकता और नाहि बचा सकता हूँ। इसी लिये बीबी बचपन से ज़िंदगी के आख़िरी समय तक अपनी चिंता में थीं और उन्होंने ख़ुद अपनी ज़िन्दगी बनाई है।
इमामे जाफ़र सादिक़ अ. फ़रमाते हैं:
 ’’انّ فاطمۃ کانت محدّثہ ( بحار الانوار ، ج،۱۴ ، ص ، ۲۰۶ )
फ़ातिमा ज़हरा मोहद्देसा थीं। यानी फ़रिश्ते उनके पास आते थे, आपके साथ बातें करते थे। किसी भी शिया या सुन्नी नें इस बात को ग़लत नहीं बताया है क्योंकि दोनों के उल्मा इस बात को मानते हैं कि बहुत से लोग ऐसे रहे हैं जिनके साथ फ़रिश्ते बात किया करते थे।
जिस तरह फ़रिश्ते जनाबे मरियम के पास आते थे और उनसे कहते थे:
’’ یا فاطمۃ: انّ اللہ اصطفٰیک و طھّر کو اصفیک علی نساء العالمین ‘‘( آل عمران ۴۲ )
आपको ख़ुदा नें चुन लिया है और अपना ख़ास बनाया है और आपको पूरी दुनिया की औरतों का सरदार बनाया है। इसी तरह फ़रिश्ते जनाबे फ़ातिमा स. के पास आते थे और उनसे कहते थे, “आपको ख़ुदा नें चुन लिया है और अपना ख़ास बनाया है और आपको पूरी दुनिया की औरतों का सरदार बनाया है”। इमाम जाफ़र सादिक़ अ. फ़रमाते हैं, “एक दिन बीबी नें फ़रिश्तों से कहा:
 آ’’الیست المفضّلۃ علی نساءالعالمین مریم؟‘‘
क्या वह जनाबे मरियम नहीं हैं जिन्हें ख़ुदा नें सारी औरतों का सरदार बनाया है? क्या वह मरियम नहीं हैं जिनके बारे में ख़ुदा नें फ़रमाया है: हम नें आपको सारी दुनिया की औरतों का सरदार बनाया है। जवाब में फ़रिश्तों नें उनसे कहा: मरियम अपने ज़माने की औरतों की सरदार थीं लेकिन आप शुरू से आख़ेरत तक, क़यामत तक सारी औरतों से महान हैं और उनकी सरदार हैं। हदीस में या है: एक दिन जनाबे फ़ातिमा ज़हरा स. नें हज़रत अली अ. से कहा: फ़रिश्ते मेरे पास आते हैं, मुझे बहुत सी बातें बताते हैं।
इमाम अली अ. नें उनसे कहा: अब जब भी आपको फ़रिश्ते की आवाज़ आए तो आप मुझे बता दिया करें ताकि मैं उसे लिख लूँ। इस तरह जब भी फ़रिश्ता आपके पास आता और आपको अल्लाह का संदेश देता तो आप उसे इमाम अली अ. से बता दिया करती थीं, इमाम अ. उसे लिख लिया करते थे, बाद में यह सारी बातें एक किताब की शक्ल में सामने आईं जिसे, “सहीफ़ए फ़ातिमा” कहा जाता है। यह किताब इमामों के पास हा करती थी जिसे वह पढ़ा करते थे। इस किताब के बारे में इमाम जाफ़र सादिक़ अ. फ़रमाते हैं:
 ’’انّہ لیس فیھا حلال و حرام‘‘
इस किताब में हलाल और हराम की बातें नहीं हैं।
 ’’ فیھا علم ما یکون ‘‘
इसमें बाद में होने वाली घटनों के बारे में है। यह आसमानी बातें हैं। आप ज़रा सोचें कि इतनी छोटी सी उम्र में ख़ुदा एक औरत के पास अपने फ़रिश्ते भेजता है जो उस से बातें करते हैं और ख़ुदा का संदेश और ग़ैब की बातें उस तक पहुँचाते हैं। यह कोई मामूली बात नहीं है।

Monday, February 12, 2018

हुसैनियों ने “शिव भक्तो” के लिए फ्री मेडिकल केम्प लगाया

ब्यूरो रिपोर्टनौगावां सादात
पिछले दिनों जहाँ उत्तर प्रदेश के जिला अमरोहा के तहसील नौगावां सादात में एक दुकान पर लगे साइन बोर्ड पर लिखे गौतम नगर और इस्लाम नगर के नाम पर एवं “1500 दलित दहशत में”के नाम से जो राजनीति चमकाने के लिए कुछ असामाजिक तत्वों ने जिस प्रकार से शहर नौगावा सादात में माहौल बिगाड़ने की कोशिश की गई थी। वही पर देश में अमन और सद्भावना का मिलाप दिखने को मिला ।
जी हाँ पवित्र शहर हरिद्वार से (121.8 km) स्तिथित जिला अमरोहा के तहसील नौगावां सादात में “हुसैनी सोसाइटी फरोग ऐ इंसानियत” ने महाशिवरात्रि के पवित्र त्यौहार के मोके पर “कावड यात्रियों” के के फ्री मेडिकल केम्प लगा कर “शिव भक्तो” का स्वागत किया एवं भाईचारा एवं सद्भावना का संदेश दिया गया। याद रहें 13Feb 2018 को देश में महाशिवरात्रि का पवित्र त्यौहार है जिसमें लाखों श्रदलों पेडल कावड यात्रा करते हैं। और जो भी पवित्र शहर हरिद्वार जाता है उसको नौगावा सादात से अवश्य गुज़रना पड़ता है।  

गोरतलब बात यह है के नौगावां सादात भारत का पहला ऐसा शहर है जहाँ 93.69%- मुस्लिम  एवं 6.00% -हिन्दू  होने के बाद भी यहाँ पर एकता बनाये रखने के लिए ही रामलीला का आयोजन दशकों से किया जाता है, बीच बस्ती में एक पुराना मंदिर भी है, एवं एक धर्मशाला भी है। यहाँ पर सभी धर्म के लोग मिलकर  रहते हैं किसी प्रकार का कोई मतभेद नहीं रहता है। इसी कदम आगे बढ़ाते हुए “हुसैनी सोसाइटी फरोग ऐ इंसानियत” ने भी कावड यात्रियों के लिए फ्री मेडिकल केम्प लगाकर मानवता का सन्देश दिया है।  
इस मोके पर डॉ समर रज़ा,समाजसेवी जीशन अख्तर, अधिवक्ता तारिक रज़ा, समाजसेवी वसीम अब्बास, समाजसेवी ज़मीन अब्बास ,हसन अब्बास, शजर आदि मौजूद रहे ।



Wednesday, January 31, 2018

हाथों में बंदूक लिए हिंदू युवक कर रहे थे फायरिंग:कासगंज


police probing new video that shows hindu youths during kasgang clashes carrying guns, firing

उत्तर प्रदेश पुलिस कासगंज हिंसा से जुड़े एक नए विडियो का परीक्षण कर रही है, जिसमें गणतंत्र दिवस वाले दिन हिंदू युवा हाथों में बंदूक लिए मुस्लिम बहुल इलाकों की तरफ जाते नजर आ रहे हैं। स्थानीय तहसील दफ्तर की छत से शूट किए गए इस विडियो में कई सारे युवक हाथों में डंडे वगैरह लिए भी नजर आ रहे हैं।

टीओआई के हाथ लगे एक्सक्लूसिव विडियो के बारे में पूछने पर एक सीनियर अधिकारी ने बताया कि पुलिस एक नए एंगल से मामले की जांच कर रही है। पहचान जारी ना होने की शर्त पर एक आईपीएस अधिकारी ने बताया, 'यह विडियो उसी जगह का है, जहां चंदन गुप्ता को गोली गली थी।' 

पुलिस के एक सूत्र ने बताया, 'वहां पर करीब 50 की संख्या में युवक मौजूद थे और उनमें से एक ने हाथ में तिरंगा झंडा लिया हुआ था। कम से कम दो के हाथों में बंदूक थी और कुछ अन्य ने डंडे ले रखे थे। इस दौरान कई राउंड हवाई फायर किए गए और मुस्लिम बहुल इलाकों की तरफ पत्थरबाजी भी की गई। 14 सेकंड के इस विडियो में नजर आ रहे युवकों की शिनाख्त के लिए एक स्पेशल टीम जांच कर रही है।' 



Sunday, January 7, 2018

UP- धार्मिक स्थलों में बिना अनुमति के बज रहे लाउडस्पीकर 15 जनवरी तक हटा दिए जाएंगे

 लखनऊ 
उत्तर प्रदेश के धार्मिक स्थलों में लगे लाउडस्पीकरों  पर अब योगी सरकार शिकंजा कसने की तैयारी में है। हाई कोर्ट के एक आदेश के बाद यूपी सरकार इस सिलसिले में कदम उठाने वाली है। हाई कोर्ट के आदेश की कॉपी सहित गृह विभाग ने सभी जिलों के डीएम को पत्र भेजकर धार्मिक स्थलों से लाउडस्पीकर हटाए जाने के बाद रिपोर्ट मांगी है। 

इसमें कहा गया है कि बिना अनुमति के लगाये गए लाउडस्पीकर हटाये जाएंगे। अनुमति 15 जनवरी तक ले लेनी होगी। 15 जनवरी के बाद किसी भी संस्थान को अनुमति नहीं दी जाएगी। 16 जनवरी से जिलों में अभियान  चलाकर बिना अनुमति के चलाए जा रहे लाउडस्पीकर हटाए जाने शुरू किए जाएंगे। यह अभियान 20 जनवरी तक चलेगा और फिर इसकी रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी। 

इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने दिसंबर में धार्मिक स्थलों में बज रहे लाउडस्पीकर्स पर कड़ी नाराजगी जताई थी। हाई कोर्ट ने इस मामले में उच्चाधिकारियों को फटकार लगाकर कार्रवाई के लिए हलफनामा दाखिल करने का आदेश दिया है। यह आदेश मोतीलाल यादव की तरफ से दायर की गई याचिका की सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने दिया था। 

जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस अब्दुल मोइन की बेंच ने कहा था कि प्रमुख सचिव गृह, सिविल सचिवालय और उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड + के चेयरमैन अलग-अलग व्यक्तिगत हलफनामा देकर छह हफ्ते में बताएं कि ध्वनि प्रदूषण को रोकने के लिए उन्होंने क्या किया? इस मामले की अगली सुनवाई 1 फरवरी 2018 को है। हाई कोर्ट ने निकाले जाने वाले जुलूस और शादी बरातों में हो रहे ध्वनि प्रदूषण को लेकर भी कार्रवाई करने को कहा है। 
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Friday, January 5, 2018

फतवा देने वाले मौलवी इतना बड़ा गुनाह समझते है तो हिन्दुस्तान में इस्लामी बैंकिंग अभी तक क्यों नही आई।

लेखक - गुलाम अब्बास किट्टी भाजपा नेता, नौगावां सादात

अमरोहा, नौगावां। दारूल उलूम ने  फतवा जारी किया है कि मुस्लिम महिलाऐं उन घरो में शादी से बचें जो बैंक कर्मी हो या उनके घर में बैंक से सम्बन्धित कमाई आती हो। यह मसला बड़ा ही हास्यस्पद है। 
की हिन्दुस्तान में सेकड़ो सालो से चली आ रही बैंकिंग प्रणाली अगर इस्लाम के खिलाफ है तो इन मौलवियों ने अभितक इसका विरोध उच्च स्तर पर क्यों नही किया। बैंको में नौकरी कर रहे लाखो मुसलमान क्या अबतक नाजाईज़ कमाई पर ही जी रहे थे। 

 यह सही है कि इस्लाम में सूद का लेने वाला, सूद का देने वाला, गवाह, सूद का लिखने वाला, सूद के लिखने के लिये कलम व किताब उपलब्ध कराने वाला, सूद के लिये पैसा मुहय्या कराने वाला, और यहां तक कि अगर किसी के सामने दो अंजान मुसलमान सूद के लेन देन की बात कर रहें हों और उन्हे उस मुसलमान ने न रोका जो उनको वह बाते करते सुन रहा था तो वह भी सूद के गुनाह में बराबर का भागीदार है। 

लेकिन अब सोचना यह है कि हिन्दुस्तान में सैकड़ो साल से चली आ रही इस बैंकिंग प्रणाली के खिलाफ फतवा देने वाले मौलवियों ने ठोस क़दम क्यों नही उठाये।

 अब कौन सा मुसलमान ऐसा है। जो बैंक में पैसा न रखता हो या बैंक से लेनदेन न करता हो। इसके अनुसार कही न कही बैंक से लेनदेन करने वाला इस गुनाह में बराबर का भागीदार है। 

अगर इसको ये फतवा देने वाले मौलवी इतना बड़ा गुनाह समझते है तो हिन्दुस्तान में इस्लामी बैंकिंग अभी तक क्यों नही आई। सैकड़ो सवाल लेखक के मन में उमड़ रहे है। जिनका जवाब शायद इन मौलवियों के पास फतवा देकर मीडिया की सुर्खियों में छा जाने के अलावा दूसरा कोई नही होगा। 




Thursday, December 28, 2017

साध्वी प्रज्ञा-पुरोहित पर आतंकवाद की दफाएं पर चलेगा मुकदमा

राज्य ब्यूरो, मुंबई : मुंबई की एक विशेष एनआइए अदालत ने मालेगांव बम विस्फोटकांड की आरोपी साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर एवं लेफ्टिनेंट कर्नल प्रसाद पुरोहित सहित अन्य छह आरोपियों से मकोका एवं हथियार अधिनियम की धाराएं हटा ली हैं। अब उन पर सिर्फ भारतीय दंड संहिता एवं यूएपीए की धाराओं के तहत ही मुकदमा चलेगा।हालांकि अदालत ने साध्वी प्रज्ञा, कर्नल पुरोहित, समीर कुलकर्णी, रमेश उपाध्याय एवं सुधाकर द्विवेदी की आरोपमुक्त करने की याचिका ठुकरा दी है। विशेष एनआइए अदालत के निर्देशानुसार सभी आरोपियों पर गैरकानूनी गतिविधि निरोधक अधिनियम (यूएपीए) की धारा 16 (आतंकी गतिविधि को अंजाम देना) एवं धारा 18 (साजिश) के तहत नए आरोप तय किए जाएंगे। इसके साथ-साथ आइपीसी की भी कुछ धाराओं में इन पर मुकदमा चलेगा। दो आरोपियों राकेश धावड़े एवं जगदीश म्हात्रे पर सिर्फ हथियार अधिनियम की धाराओं के तहत मुकदमा चलेगा। जबकि अदालत ने तीन आरोपियों प्रवीण टाकलकी, श्यामलाल शाहू एवं शिवनारायण कालसंगरा को विस्फोटकांड से बरी कर दिया है। मामले के ज्यादातर आरोपी जमानत पर बाहर हैं। पहले दिए गए जमानती बांड मुकदमा चलने के दौरान जारी रहेंगे। एनआइए अदालत में मामले की अगली सुनवाई 15 जनवरी को निर्धारित की गई है।
गौरतलब है कि 29 सितंबर, 2008 को नासिक के मालेगांव कस्बे में हुए दोहरे विस्फोटकांड में सात लोग मारे गए थे और करीब 100 लोग घायल हुए थे। ये विस्फोट एक मोटरसाइकिल के जरिए अंजाम दिए गए थे। वह मोटरसाइकिल साध्वी प्रज्ञा ने कुछ वर्ष पहले ही बेची थी। इसी आधार पर महाराष्ट्र एटीएस ने साध्वी प्रज्ञा को इस मामले में आरोपी बनाकर उसी वर्ष अक्टूबर में गिरफ्तार कर लिया था। 
जबकि लेफ्टीनेंट कर्नल प्रसाद पुरोहित को हिंदूवादी संगठन अभिनव भारत से संबद्ध होने के कारण एटीएस ने इस मामले में आरोपी बनाया था। प्रज्ञा और पुरोहित सहित मकोका के तहत आरोपी बनाए गए सभी आरोपियों से निचली अदालत भी एक बार मकोका हटा चुकी है। लेकिन बांबे उच्च न्यायालय ने सभी पर पुन: मकोका लगा दिया था। एनआइए के विशेष जज एस.डी.टेकले के अनुसार सभी आरोपियों से यूएपीए की धाराएं 17 (आतंकी गतिविधि के लिए धन इकट्ठा करना), 20 (आतंकी संगठन का सदस्य होना) एवं 23 (आतंकी संगठन से जुड़े किसी व्यक्ति की मदद करना) भी हटा ली गई हैं। 
एमसीओसीए (मकोका) महाराष्ट्र सरकार का एक ऐसा सख्त कानून है, जिसे पुलिस यह साबित होने के बाद ही लागू कर सकती है कि आरोपी संगठित गिरोह का सदस्य है, और अपराध किसी आर्थिक लाभ के उद्देश्य से किया गया है। मकोका लगने वाले आरोपी के विरुद्ध पिछले 10 साल में कम से कम दो आरोपपत्र भी दाखिल होने चाहिए। मकोका के तहत आरोपी बनने पर किसी व्यक्ति को आसानी से जमानत नहीं मिलती। मकोका आरोपी को पुलिस कम से कम 30 दिन तक अपनी हिरासत में रख सकती है। जबकि आइपीसी के तहत यह अवधि सिर्फ 14 दिन की है। मकोका आरोपी के विरुद्ध आरोपपत्र पेश करने की अधिकतम अवधि 180 दिन रखी गई है। जबकि आइपीसी के तहत पुलिस को अधिकतम 60 दिन या 90 दिन में आरोपपत्र पेश करना होता है। बता दें कि अब उत्तर प्रदेश सरकार भी मकोका की तर्ज पर यूपीकोका कानून बनाने की तैयारी कर रही है.


मोदी सरकार के खजाने में भारी चोट - GST की मार देश को नुकसान GST से घटा रेवेन्यू, उधार लेगी मोदी सरकार

नई दिल्ली 
जीएसटी लागू होने के बाद लगातार गिर रहा रेवेन्यू सरकार के लिए चिंता का कारण बना हुआ है। 2017-18 में राजकोषीय घाटा टारगेट को पार कर सकता है। इसे देखते हुए सरकार चालू वित्त वर्ष 2017-18 में 50 हजार करोड़ रुपये उधार लेगी। जनवरी से मार्च के बीच यह अतिरिक्त उधार लिया जाएगा, जिससे देश का राजकोषीय घाटा और बढ़ जाएगा। बुधवार को सरकार ने एक आधिकारिक बयान में कहा कि जनवरी से मार्च के बीच गवर्नमेंट सिक्यॉरिटीज से 50 हजार करोड़ रुपये का अतिरिक्त उधार लिया जाएगा।
वित्त मंत्रालय ने बताया कि अगले वित्त वर्ष के उधारों में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा और वह बजट 2017-18 के मुताबिक ही होगा। रिजर्व बैंक के साथ उधार कार्यक्रम रिव्यू करने के बाद यह तय किया गया है कि सरकार वित्त वर्ष 2017-18 में अतिरिक्त उधार लेगी जो डेटेड गवर्नमेंट सिक्यॉरिटीज से लिया जाएगा। 
इसके अलावा मार्च 2018 तक ट्रेजरी बिल्स को अभी के 86,203 करोड़ रुपये से घटाकर 25,006 करोड़ रुपये तक पहुंचाया जाएगा। ट्रेजरी या टी-बिल्स वह सिक्यॉरिटीज होती हैं, जिनकी मैच्यॉरिटी एक साल से भी कम होती है। वहीं दूसरी तरफ डेटेड सिक्यॉरिटीज की मैच्यॉरिटी 5 साल से ज्यादा होती है। 
जीएसटी कलेक्शन में गिरावट 
नवंबर में जीएसटी कलेक्शन लगातार दूसरे माह गिरकर 80,808 करोड़ रुपये रह गया। अक्टूबर में जीएसटी कलेक्शन 83 हजार रुपये था और 53,06 लाख रिटर्न फाइल किए गए थे। रेवन्यू में आ रही लगातार गिरावट सरकार के खजाने में भारी चोट पहुंचा रही है और राजकोषीय घाटे पर भी उसका बोझ पड़ रहा है। 

Wednesday, December 27, 2017

दाढ़ी रखने वाले मुस्लिम छात्रों को NCC कैम्प से निकला, इंदिरा गांधी या मनमोहन सिंह का राज नहीं है -एनसीसी हेड रजनीष

जामिया मिल्लिया इस्लामिया के 11 स्टूडेंट्स ने शिकायत की है कि उन्हें एनसीसी कैंप से सिर्फ इसलिए निकाल दिया गया कि उन्होंने दाढ़ी रखी है। इन स्टूडेंट्स ने सोमवार को कैंपस में प्रोटेस्ट भी किया।
स्टूडेंट्स का आरोप है कि रोहिणी स्थित एनसीसी हेडक्वॉटर में 6 दिन विंटर कैंप अटेंड करने के बाद एनसीसी हेड रजनीष ने उन्हें रविवार को कैंप से निकलने का नोटिस दिया गया। जो स्टूडेंट्स बिना दाढ़ी के हैं, उनका कैंप जारी है।
स्टूडेंट्स का कहना है कि उनसे यह भी कहा गया कि इंदिरा गांधी या मनमोहन सिंह का राज नहीं चल रहा है।
स्टूडेंट्स ने सोमवार शाम वाइस चांसलर प्रो़ तलत अहमद से मुलाकात कर एनसीसी हेड पर सख्त कार्रवाई की मांग की। जामिया प्रशासन का कहना है कि मामले की जांच की जाएगी और अगर वाकई ऐसा हुआ है तो एक्शन लिया जाएगा।
इस सबंध में छात्रों का कहना है कि हम ये कैंप पिछले 3 वर्षों से कर रहे हैं परंतु इस तरह का व्यवहार कभी नहीं किया गया. एलएलबी पहले वर्ष के छात्र दिलशाद अहमद ने कहा, ‘हमने आवेदन दिया था कि हम धार्मिक वजहों से दाढ़ी रखते हैं और हम पिछले दो सालों से अधिक समय से एनसीसी का हिस्सा हैं और हमसे कभी भी दाढ़ी हटाने को नहीं कहा गया।
वहीँ एक अन्य छात्र इमरान चौधरी का कहना है कि भारतीय संविधान या रक्षा सेवा , पुलिस प्रशासन मे इस तरह का कोई कानुन या नियम नहीं है . यह एक भेदभाव पूर्ण घटना है इस विधान के साथ खिलवाड़ है तथा व्यक्तिगत स्वतंत्रता का उल्लंघन है।
छात्रों का आरोप है कि उन्हें अपमानित करने के साथ पुलिस कार्रवाई की भी धमकी दी गई. इस मामले में अब यूनिवर्सिटी का कहना है कि वह मामले की जांच कर पता लगाएगी कि कैम्प में क्या हुआ था।

जामिया की मीडिया संयोजक साइमा सईद ने कहा कि हमारा पहला उद्देश्य हमारे स्टूडेंट्स को सहयोग और कानूनी रूप से मदद देना है।

Tuesday, December 26, 2017

IS का विनाश करने में 23 हजार इराकी जवान शहीद हुए

मोसुल, आइएएनएस : इराक में आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट (आइएस) की राजधानी मोसुल पर दोबारा कब्जा पाने में सुरक्षा बलों को नाकों चने चबाने पड़ गए। नौ महीने से ज्यादा चले भीषण संघर्ष में इराकी सुरक्षा बलों को 23 हजार जवान शहीद हुए । यह जानकारी इराकी संसद को दी गई है।  संसद की रक्षा मामलों की समिति के प्रमुख हाकिम अल-जामिली के अनुसार इस संघर्ष में करीब 70 हजार जवान घायल हुए। संघर्ष में मोसुल शहर बर्बाद हो गया जिससे करीब तीन अरब डॉलर (करीब 20,000 करोड़ रुपये) का नुकसान हुआ। संघर्ष के चलते मोसुल के लोगों को हुआ नुकसान इसके अतिरिक्त है। इस प्राचीन शहर पर आइएस ने 2014 में कब्जा किया था जो करीब तीन साल तक बना रहा। संसदीय समिति अब उन कारणों का पता लगा रही है जिनके चलते आतंकी संगठन इस शहर को अपना मुख्य ठिकाना बनाने में कामयाब रहा। इस सिलसिले में अभी कोई न्यायिक जांच नहीं की जा रही है। उल्लेखनीय है कि मोसुल हाथ से निकलने पर ही इराक में आइएस की कमर टूटी थी। सीरिया की सीमा के नजदीक स्थित इस शहर से कब्जा खत्म होने पर आइएस के लड़ाके पड़ोसी देश गए। वहां पर भी कुछ महीनों के बाद एक-एक करके इलाके हाथ से निकलते चले गए। सीरिया की राजधानी रक्का भी इसी दौर में आइएस के हाथ से निकल गई थी। इसी के बाद इराक और सीरिया से आइएस का खात्मा संभव हो सका।मोसुल, आइएएनएस : इराक में आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट (आइएस) की राजधानी मोसुल पर दोबारा कब्जा पाने में सुरक्षा बलों को नाकों चने चबाने पड़ गए। नौ महीने से ज्यादा चले भीषण संघर्ष में इराकी सुरक्षा बलों को 23 हजार जवान गंवाने पड़े। यह जानकारी इराकी संसद को दी गई है। 1 संसद की रक्षा मामलों की समिति के प्रमुख हाकिम अल-जामिली के अनुसार इस संघर्ष में करीब 70 हजार जवान घायल हुए। संघर्ष में मोसुल शहर बर्बाद हो गया जिससे करीब तीन अरब डॉलर (करीब 20,000 करोड़ रुपये) का नुकसान हुआ। संघर्ष के चलते मोसुल के लोगों को हुआ नुकसान इसके अतिरिक्त है। इस प्राचीन शहर पर आइएस ने 2014 में कब्जा किया था जो करीब तीन साल तक बना रहा। संसदीय समिति अब उन कारणों का पता लगा रही है जिनके चलते आतंकी संगठन इस शहर को अपना मुख्य ठिकाना बनाने में कामयाब रहा। इस सिलसिले में अभी कोई न्यायिक जांच नहीं की जा रही है। उल्लेखनीय है कि मोसुल हाथ से निकलने पर ही इराक में आइएस की कमर टूटी थी। सीरिया की सीमा के नजदीक स्थित इस शहर से कब्जा खत्म होने पर आइएस के लड़ाके पड़ोसी देश गए। वहां पर भी कुछ महीनों के बाद एक-एक करके इलाके हाथ से निकलते चले गए। सीरिया की राजधानी रक्का भी इसी दौर में आइएस के हाथ से निकल गई थी। इसी के बाद इराक और सीरिया से आइएस का खात्मा संभव हो सका। 
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Monday, December 25, 2017

भारत का इजराईल के खिलाफ वोटिंग करना स्वागत योग्य

आज का सच , ब्यूरो
यह बहुत ख़ुशी की बात है कि येरूशलम को इजराईल की राजधानी बनाने के अमेरिकी फैसले की निंदा व फिलीस्तीन के हक में भारत सरकार की वोटिंग करना स्वागत योग्य कदम है ।  भारत सरकार ने अमेरिका के विरुद्ध वोटिंग कर देश के मुसलमानों के जज्बात का ध्यान रखा है।  केंद्र सरकार ने फिलीस्तीन के हक में वोटिंग कर भारत के  मुसलमानों के जज्बात का ख्याल रखा है।   अमेरिका की धमकियों के बावजूद इजराईल के खिलाफ वोटिंग करने वाले  भारत सरकार एवं 128 देशों का   भी आभार व्यक्त करते  है।   फिलीस्तीनी आवाम पर हो रहे जुल्म-ओ-सितम के खिलाफ पूरी तमाम देशों को  एकजुट होना चहिये ।   
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भेदभाव - 50,000 मदरसा टीचरों को केंद्र ने नहीं दी सैलरी


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रिपोर्ट - अंजु जायसवाल/शिवानी आजाद, आगरा/देहरादून 
देश के 16 राज्यों के 50,000 से अधिक मदरसा शिक्षकों को पिछले दो सालों से केंद्र की तरफ से सैलरी नहीं मिली है जिस वजह से वे अपना पद छोड़ने के लिए मजबूर हो रहे हैं। इनमें यूपी, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश और झारखंड भी शामिल हैं जहां के मदरसा शिक्षकों को स्कीम फॉर प्रोवाइडिंग क्वॉलिटी एजुकेशन (SPQEM) के तहत केंद्र की तरफ से दिया जाने वाला सैलरी का हिस्सा नहीं मिला है।
SPQEM की शुरुआत मानव संसाधन विकास मंत्रालय द्वारा 2008-09 में मदरसाओं में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए की गई थी। इसके तहत मदरसा टीचरों को सैलरी का एक बड़ा हिस्सा केंद्र सरकार की तरफ से मिलना था। ग्रैजुएट टीचर्स को 6,000 प्रतिमाह, जबकि पोस्ट ग्रैजुएट टीचर्स को 12,000 रुपये प्रतिमाह दिया जाता है, जो कि उनकी सैलरी का क्रमशः 75 और 80 प्रतिशत है। सैलरी का बाकी हिस्सा राज्य सरकारें देती हैं। 
मदरसा टीचर करेंगे प्रदर्शन 
अखिल भारतीय मदरसा आधुनिकीकरण शिक्षक संघ (ABMASS) मुस्लिम राजा खान ने कहा, 'भारत में आधे मदरसा यूपी में है जिनमें 25,000 शिक्षक हैं। 16 राज्यों में शिक्षकों को केंद्र सरकार से दो सालों से सैलरी नहीं मिली। कुछ राज्यों में उन्हें तीन सालों से सैलरी नहीं दी गई। हमने 8 जनवरी को लखनऊ में प्रदर्शन का फैसला किया है।' 

यूपी मदरसा बोर्ड के रजिस्ट्रार राहुल गुप्ता ने सैलरी न मिलने की पुष्टि करते हुए कहा, ' 2016-17 में 296.31 करोड़ रुपये केंद्र द्वारा जारी नहीं किए गए। 2017-18 में अब तक फंड जारी नहीं किया गया है।' 

Thursday, December 21, 2017

प्रदेश सरकार ने नगर पालिका क्षेत्र के 25 व्यवसाय का लाइसेंस शुल्क बढ़ा दिया है।


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अमरोहा: प्रदेश सरकार ने नगर पालिका क्षेत्र के 25 व्यवसाय का लाइसेंस शुल्क बढ़ा दिया है। 1अब प्रदेश सरकार ने नगरीय क्षेत्र में 25 व्यवसाय का लाइसेंस शुल्क बढ़ा दिया है। इन व्यवसाय का लाइसेंस लेने के लिए बढ़ा शुल्क जमा करना होगा तथा पूर्व में संचालित व्यवसाय को भी भविष्य में बढ़ा हुआ शुल्क अदा करना पड़ेगा। इस बारे में नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी विजेंद्र पाल सिंह ने बताया कि शासनादेश के तहत पालिका क्षेत्र में संचालित होने वाले व्यवसाय पर वार्षिक शुल्क बढ़ाया गया है। इनमें होटल लॉज, गेस्ट हाउस व बरात घरको पांच हजार, तीन सितारा होटल को नौ हजार पांच सितारा होटल को 12 हजार, बीस बेड के अस्पताल के लाइसेंस पर दो हजार, बीस बेड से अधिक के अस्पताल के लाइसेंस पर पांच हजार, बीस बेड के प्रसूति गृह पर चार हजार, बीस बेड से अधिक से प्रसूति गृह के लाइसेंस पर पांच हजार, प्राइवेट अस्पताल पांच हजार, पैथोलॉजी सेंटर के लाइसेंस का शुल्क एक हजार रुपये कर दिया गया है। उन्होंने बताया कि इसके अलावा एक्स-रे क्लीनिक दो हजार, डेंटल क्लीनिक चार हजार, प्राइवेट क्लीनिक तीन हजार, दो सीटर आटो रिक्शा 360 रुपये, चार सीटर आटो रिक्शा पांच सौ रुपये तथा सात सीटर रिक्शा का लाइसेंस शुल्क 720 रुपये है। इसके अलावा मिनी बस का 1500 रुपये, बस का 2500 रुपये, ट्राली का 150 रुपये तथा तांगा संचालन का लाइसेंस लेने का शुल्क मात्र 50 रुपये रखा गया है। 1फाइनेंस कंपनी, बीयर बार व देसी शराब की दुकान के लाइसेंस का शुल्क बढ़ा कर छह हजार रुपये कर दिया गया है। इंश्योरेंस कंपनी व विदेशी शराब की दुकान के लाइसेंस का शुल्क 12 हजार रुपये निर्धारित किया गया है। इओ ने बताया कि शासनादेश मिलने पर सभी व्यवसाय संचालकों को सूचीबद्ध किया जा रहा है। उन्हें नोटिस भेजा जाएगा। 


तेहरान और आसपास के इलाकों में भूकंप के झटके

राजधानी तेहरान और उसके आस पास के इलाकों में बुधवार की रात भूकंप के झटके महसूस किये गये जिसके बाद लोगों में भय व आतंक फैल गया और लोग सड़कों पर निकल आए।

भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 5 दशमलव 2 बतायी गयी है। भूकंप के झटके, " गीलान" " अलबुर्ज़" " क़ुम" प्रान्तों और  " क़ज़वीन" में महसूस किये गये। 

इस भूकंप का केन्द्र अलबुर्ज़ प्रान्त के केन्द्रीय नगर " करज" के दस किलोमीटर दक्षिण में था जो राजधानी तेहरान के पश्चिम में 40 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। 

Image result for iranयह भूकंप स्थानीय समयानुसार 11 बजकर 27 मिनट पर आया। भूकंप 7 किलोमीटर ज़मीन की गहरायी में आया है। 

अभी तक किसी प्रकार के नुकसान की रिपोर्ट नहीं मिली है। 

सरकारी स्तर पर संबंधित विभागों को अलर्ट कर दिया गया है और लोगों से भी कहा गया है कि वह कुछ घंटें सुरक्षा उपायों पर ध्यान दें। 

हालिया दिनों में " किरमानशाह" और " किरमान" सहित ईरान के विभिन्न क्षेत्रों में भूकंप के कारण बहुत से लोग मारे गये हैं। 

"शाही खाना" बासमती चावल, बिरयानी चावल Naugawan City Center (NCC) (नौगावा सिटी सेंटर) पर मुनासिब दामों पर मिल रहे हैं।

White Shahi Khana Basmati Rice, Plastic Bag,  ₹ 75 / kg  शाही खाना बासमती चावल, NOORE JANNAT, GLAXY,NWAZISH बिरयानी चावल  Naugawan City Cent...