Tuesday, December 8, 2020

आज Bharat Bandh 2020 - पूरे देश से किसान आंदोलन को मिल रहा समर्थन

 कड़कड़ाती ठंड किसान सडको पर क्यों 

पिछले 12  दिनों से भी अधिक समय से भारत के विभिन्न हिस्सों में किसान मोदी सरकार द्वारा लाए गए तीन विवादित कृषि क़ानूनों के ख़िलाफ़ प्रदर्शन कर रहे हैं। इसमें पंजाब और हरियाणा के किसानों ने अग्रणी भूमिका निभाई है और वे इसके विरोध में कड़कड़ाती ठंड में भी दिल्ली की विभिन्न सीमाओं पर धरना दे रहे हैं। किसानों का सरकार से मूलभूत सवाल यह है कि क्या किसी किसान आंदोलन में कभी भी यह तीन क़ानून बनाने की मांग उठी थी? क्या क़ानून बनाते समय किसी किसान संगठन से विचार विमर्श किया गया था? आख़िर क्यों आनन-फानन में कोविड-19 महामारी और लॉकडाउन के बीच इन क़ानूनों को लाया गया? यदि यह क़ानून किसानों के हित में है, तो क्यों कोई भी बड़ा किसान संगठन इसके पक्ष में नहीं है? वैसे तो भारत के केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर समेत बीजेपी के तमाम नेता इन सवालों से बचने की कोशिश कर रहे हैं, हालांकि क़ानून को लेकर मोदी सरकार और किसान के बीच पांच राउंड की बातचीत हो चुकी है, लेकिन अभी तक कोई प्रभावी निष्कर्ष नहीं निकल पाया है। भारतीय किसानों की मांग है कि सरकार न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) को क़ानूनी अधिकार बनाए, ताकि कोई भी ट्रेडर या ख़रीददार किसानों से उनके उत्पाद एमएसपी से कम दाम पर न ख़रीद पाए। यदि कोई ऐसा करता है तो उस पर कार्रवाई होनी चाहिए। भारतीय किसानों का आरोप है कि सरकार इन तीन क़ानूनों के ज़रिये एमएसपी एवं मंडियों की स्थापित व्यवस्था को ख़त्म करना चाह रही है, जिसका सीधा लाभ सिर्फ़ और सिर्फ़ बड़े उद्योगपतियों और ट्रेडर्स को होगा और इसके चलते किसान उनके रहम पर जीने पर विवश हो जाएंगे।

मोदी सरकार का दावा किसान को कोई नुकसान नही 

वैसे तो मोदी सरकार का दावा है कि वह इन तीनों नए क़ानूनों के ज़रिये किसानों के लिए एक विशाल कृषि बाज़ार तैयार कर रही है, जहां वह अपनी इच्छा के अनुसार अपनी पसंद की जगह पर बिक्री कर सकेंगे। इसके साथ ही भारत सरकार की दलील है कि एपीएमसी व्यवस्था में बिचौलियों के चलते किसानों का नुक़सान हो रहा था, इसलिए उन्होंने कृषि बाज़ार को सरकारी नियंत्रण से मुक्त किया है। हालांकि किसान एवं कृषि संगठन कहते हैं कि यह बात सही है कि एपीएमसी मंडियों में समस्याएं थीं, लेकिन उन्हें सुधारने के बजाय सरकार किसानों के सामने बहुत बड़ा संकट खड़ा कर रही है।

इस कानून से बड़े उद्योगपतियों और ट्रेडर्स को ही फ़ायदा

 इस नई व्यवस्था से बड़े उद्योगपतियों और ट्रेडर्स को ही फ़ायदा पहुंचने वाला है, किसानों को नहीं। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि नए क़ानून के कारण यदि मंडियां ख़त्म होती हैं तो एमएसपी भी अपने आप अप्रासंगिक हो जाएगा। इन एपीएमसी मंडियों के बाहर भी ख़रीद-बिक्री के छोटे स्थानों पर उत्पादों के मूल्य मंडी भाव के आधार पर तय होते हैं। इस तरह किसानों को उचित दाम दिलाने में इन मंडियों की प्रमुख भूमिका है। इसलिए किसान मांग कर रहे हैं कि सरकार एक कानून लाए कि मंडी या मंडी से बाहर एमएसपी से नीचे की ख़रीद ग़ैरक़ानूनी होगी। कृषि विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि मोदी सरकार द्वारा बनाया गया नया क़ानून बड़े ट्रेडर्स को जमाखोरी की छूट देगा, जिससे वह मार्केट में इन चीज़ों की कमी करके रेट बढ़ाएंगे और मुनाफ़ा कमाएंगे। इससे ग़रीब एवं मध्यम वर्ग को नुक़सान होने की संभावना है।

 आज भारत बंद का आह्वान 

वहीं भारत की राजधानी दिल्ली के बॉर्डरों पर लाखों की संख्या में मोदी सरकार द्वारा बनाए गए विवादित नए कृषि क़ानून का का विरोध कर रहे किसानों ने पांच दौर की बातचीत से न निकलने वाले नतीजों को देखते हुए (आज) 8 दिसंबर मंगलवार को भारत बंद का आह्वान किया है। 

जानकारों का मानना है की सरकार वापस नही लेगी कानून 

जानकारों का मानना है कि मोदी सरकार किसानों से वादे तो कर सकती है लेकिन वह उन्हें लिखित आश्वासन नहीं देगी। वहीं किसानों का आरोप है कि अब तक मोदी सरकार ने जिस-जिस से जो वादा किया है उसको पूरा नहीं किया है इसलिए वह वादों के जाल में नहीं फंसना चाहते हैं और उनका कहना है कि हमे जवाब हां या नहीं में ही चाहिए। इस बीच कई टीकाकारों का यह भी कहना है कि 5 नवंबर को किसानों और केंद्र सरकार के बीच हुई बातचीत में कोई नतीजा निकल सकता था, लेकिन उसको जानबूझकर टाला गया है। टीकाकारों के अनुसार मोदी सरकार 8 दिसंबर को किसानों द्वारा भारत बंद की सफलता को देखना चाहती है। अगर भारत बंद का असर पूरे भारत में देखने को मिला तो मोदी सरकार ज़रूर थोड़ा पीछे हटेगी और किसानों को लिखित आश्वासन दे सकती है। जबकि कुछ जानकारों का यह भी कहना है कि मोदी सरकार के पास इस विवादित क़ानून को वापस लेने के अलावा अब कोई रास्ता नहीं बचा है। अगर केंद्र सरकार ने इस विवादित क़ानून को वापस नहीं लिया तो उसके हाथ से कई राज्य की सरकारें जा सकती हैं। वहीं भारत बंद का कांग्रेस सहित कई राजनीतिक पार्टियों ने भी समर्थन करने का एलान किया है। अब देखना है कि कृषि प्रधान देश भारत में किसानों और सरकार के बीच जारी संघर्ष में कौन विजयी होता है। जहां किसानों के साथ लड़ाई में भारत की आम जनता उनका साथ दे रही है वहीं मोदी सरकार के साथ गोदी मीडिया के नाम से जाना जाने वाला भारत का विशाल मीडिया तंत्र और इस देश के बड़े कॉर्पोरेट घराने खड़े दिखाई दे रहे हैं।







 

Sunday, December 6, 2020

नए कृषि क़ानूनों को वापस नहीं लिया जा सकता - भारत सरकार, आंदोलन कर रहे किसान अपनी इसी मांग पर डटे हुए हैं।

 भारत में कृषि क़ानूनों की वापसी की मांग को लेकर किसानों का आंदोलन शनिवार को दसवें दिन भी जारी रहा और सरकार से किसान संगठनों की पांचवें दौर की वार्ता भी हुई। केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर और केंद्रीय वाणिज्‍य मंत्री पीयूष गोयल के साथ सरकार के अन्‍य प्रतिनिधि किसानों के साथ बैठक में मौजूद रहे। किसानों को संबोधित करते हुए भारत के कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि तीनों क़ानूनों को पूरी तरह वापस नहीं लिया जा सकता लेकिन सरकार किसानों के सुझावों पर विचार करने, बातचीत करने और संशोधन करने को तैयार है। इस पर किसान नेताओं ने कहा क‍ि वे किसी भी संशोधन को स्‍वीकार करने को तैयार नहीं हैं। उन्होंने बल दे कर कहा कि तीनों क़ानूनों को वापस लिया जाना चाहिए।



केंद्र की ओर से वार्ता की अगुवाई कर रहे तोमर ने कहा कि सरकार किसान नेताओं के साथ सौहार्दपूर्ण बातचीत के लिए प्रतिबद्ध है और किसानों की भावनाओं को आहत नहीं करना चाहती। सरकार से बातचीत के दौरान किसान नेताओं ने कहा कि हमारे पास एक साल की सामग्री है और अगर सरकार चाहती है कि हम सड़क पर रहें, तो हमें कोई समस्या नहीं है। उन्‍होंने कहा कि हम कॉरपोरेट फ़ार्मिंग नहीं चाहते हैं, इन क़ानूनों से किसानों को नहीं, सरकार को फ़ायदा होगा इससे पहले आंदोलन कर रहे किसानों ने आठ दिसम्बर को भारत बंद का ऐलान किया था और चेतावनी दी थी कि अगर सरकार ने उनकी मांगें नहीं मानीं तो वे राष्ट्रीय राजधानी की तरफ़ जाने वाली सड़कों को बंद कर देंगे।

Friday, December 4, 2020

होशियार हो जाएं। आधार कार्ड बनाने के लिए अधिक फीस लेने वाले के ऊपर होगी कार्रवाई अधिक फीस लेने पर 1947 पर कॉल करके शिकायत कर सकते हैं।

 UIDAI की ओर से जानकारी दी गई है कि UIDAI आधार सेवाओं के लिए किसी भी एजेंसी की ओर से ज्यादा पैसे मांगे जाने के खिलाफ है. अगर कोई एजेंसी धारक आपसे ज्यादा पैसे मांगता है तो आप उसकी शिकायत uidai.gov.in पर मेल के जरिए या फिर 1947 नम्बर पर फोन करके कर सकते हैं.

 अगर आप आधार बनवाने या अपडेट कराने जाते हैं और आपसे एजेंसी धारक आधार सेवाओं के लिए ज्यादा पैसे मांग रहा है तो आप उसकी उसकी शिकायत कर सकते हैं. UIDAI की ओर से जानकारी दी गई है कि UIDAI आधार सेवाओं के लिए किसी भी एजेंसी की ओर से ज्यादा पैसे मांगे जाने के खिलाफ है. अगर कोई एजेंसी धारक आपसे ज्यादा पैसे मांगता है तो आप उसकी शिकायत uidai.gov.in पर मेल के जरिए या फिर 1947 नम्बर पर फोन करके कर सकते हैं. UIDAI ने सभी सेवाओं के लिए चार्ज तय कर रखें हैं. आइये इन चार्जेस के बारे में.


अधिकतम फीस 100 रुपये रखी गई है

 UIDAI की ओर से आधार अपडेट कराने या बायोमेट्रिक अपडेट कराने की अधिकतम फीस 100 रुपये रखी गई है.अगर आप आधार इनरोलमेंट कराने गए हैं तो आपको कोई शुल्क नहीं देना होगा.बच्चों के लिए आवश्यक बायोमेट्रिक अपडेट कराने के लिए एजेंसी वाला आपसे कोई शुल्क नहीं लेगा.आप अपना एड्रेस बदलवाते हैं या कोई डेमोग्रेफिक अपडेट कराते हैं तो आपको 50 रुपये फीस देनी होगी.UIDAI की ओर से एक बारकोड जारी किया गया है जिसे स्कैन करके आप सभी तरह की फीस के बारे में जान सकते हैं.

Tuesday, December 1, 2020

नोटा को सबसे ज्यादा मत मिलने पर चुनाव रद्द हो Petition to Supreme Court

 सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर कर चुनाव आयोग को यह निर्देश देने का अनुरोध किया गया है कि अगर किसी निर्वाचन क्षेत्र में नोटा को सबसे अधिक मत मिलते हैं तो उस क्षेत्र के परिणाम रद्द कर दिए जाएं और नए सिरे से चुनाव कराए जाएं। 

यह याचिका भाजपा नेता और अधिवक्ता अश्विनी कुमार उपाध्याय द्वारा दायर की गयी है। याचिका में यह भी अनुरोध किया गया है कि रद्द हुए चुनाव के उम्मीदवारों को नए चुनाव में भाग लेने की अनुमति नहीं दी जाए।

वकील अश्विनी कुमार दुबे के जरिए दायर याचिका में कहा गया है कि न्यायालय यह घोषणा कर सकता है कि यदि 'इनमें से कोई नहीं (नोटा) को सबसे ज्यादा मत मिलते हैं, तो उस निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव को रद्द कर दिया जाएगा और छह महीने के भीतर नये सिरे से चुनाव कराए जाएं। इसके अलावा रद्द चुनाव के उम्मीदवारों को नए चुनाव में भाग लेने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।

याचिका में कहा गया है कि कई बार राजनीतिक दल मतदाताओं से मशविरा किए बिना ही अलोकतांत्रिक तरीके से उम्मीदवारों का चयन करते हैं। इसीलिए कई बार निर्वाचन क्षेत्र के लोग पेश किए गए उम्मीदवारों से पूरी तरह असंतुष्ट होते हैं। याचिका के अनुसार, अगर सबसे अधिक मत नोटा को मिलते हैं तो इस समस्या का हल नए चुनाव से हो सकता है

Add caption


नोटा का अर्थ है- नन ऑफ द एबव, यानि इनमें से कोई नहीं। NOTA का उपयोग पहली बार भारत में 2009 में किया गया था। स्थानीय चुनावों में मतदाताओं को NOTA का विकल्प देने वाला छत्तीसगढ़ भारत का पहला राज्य था। NOTA बटन ने 2013 के विधानसभा चुनावों में चार राज्यों - छत्तीसगढ़, मिजोरम, राजस्थान और मध्य प्रदेश और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र, दिल्ली में अपनी शुरुआत की।] 2014 से नोटा पूरे देश मे लागू हुआ।[कृपया उद्धरण जोड़ें]भारत निर्वाचन आयोग ने दिसंबर २०१३ के विधानसभा चुनावों में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन में इनमें से कोई नहीं अर्थात `नोटा`(नन ऑफ द एबव) बटन का विकल्प उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।

2018 में नोटा को भारत में पहली बार उम्मीदवारों के समकक्ष दर्जा मिला। हरियाणा में दिसंबर २०१८ में पांच जिलों में होने वाले नगर निगम चुनावों के लिए हरियाणा चुनाव आयोग ने निर्णय लिया कि नोटा के विजयी रहने की स्थिति में सभी प्रत्याशी अयोग्य घोषित हो जाएंगे तथा चुनाव पुनः कराया जाएगा। हालांकि अभी भारत निर्वाचन आयोग ने इसे लागू नही किया है।


भारतीय आम चुनाव, 2019 में भारत में लगभग 1.04 प्रतिशत मतदाताओं ने उपरोक्त में से कोई नहीं (नोटा) के लिए मतदान किया, जिसमें बिहार 2.08 प्रतिशत नोटा मतदाताओं के साथ अग्रणी रहा।

Tuesday, November 10, 2020

यूपी उपचुनाव रिजल्ट : नौगावां सादात


अमरोहा नौगांवा सादात सीट से सपा आगे. सपा प्रत्याशी मौलाना जावेद आब्दी  14795 मतों से BJP प्रत्याशी Sangita से हार गए.

नौगावां सादात विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में मतों की गिनती 35 राउंड में पूरी होए. कोविड प्रोटोकॉल के तहत 19 टेबल पर मतों की गिनती होई

नौगावां सादात विधानसभा सीट पर ये हैं प्रत्याशी :

प्रत्याशी                 दल 
डा.कमलेश सिंह      कांग्रेस 4507
जावेद अब्बास        सपा 71376
फुरकान अहमद       बसपा 38253
संगीता चौहान         भाजपा 86171



बिहार इलेक्शन रिजल्ट! Live

 



Monday, July 6, 2020

UP- 15 जुलाई से ऑनलाइन पढ़ाई शुरू। सवाल है कि कितने अभिभावकों पास मोबाइल और इंटरनेट की सुविधा है?

महामारी कोविड-19 के चलते देश में आर्थिक स्थिति की हानि के अलावा देश में शिक्षा क्षेत्र में बहुत बड़ी हानि हुई है।
उत्तर प्रदेश सरकार ने जल्द ही माध्यमिक शिक्षा परिषद के सभी स्कूलों को खोले जाने की अनुमति दी है और ऑनलाइन  कक्षाएं चलाने के लिए दिशा निर्देश दिए हैं, परंतु  सवाल यह है कि कितने लोगों के पास इंटरनेट की सुविधा है और कितने लोगों के पास मल्टीमीडिया मोबाइल मौजूद है? सवाल यह भी है कि जिन अभिभावकों के पास मल्टीमीडिया मोबाइल नहीं है, इंटरनेट की सुविधा नहीं है। वह अपने बच्चों को किस प्रकार से शिक्षा ग्रहण करवाएंगे?
उत्तर प्रदेश सरकार ने सभी शिक्षा बोर्ड के माध्यमिक विद्यालयों में ऑनलाइन शिक्षण और नए सत्र के प्रवेश के लिए प्रधानाचार्यों, शिक्षकों और शिक्षणेतर कर्मियों को 6 जुलाई से बुलाने की अनुमति दे दी है। विद्यालयों में स्टाल लगाकर किताबों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी। इसके अलावा फीस न देने वाले सामर्थ्यवान अभिभावकों से प्राथमिकता के आधार पर फीस वसूली जाएगी। आर्थिक कठिनाइयों के कारण असमर्थ अभिभावकों के प्रार्थना पत्र देने पर उनसे किश्तों में फीस वसूली जाएगी।
माध्यमिक शिक्षा विभाग की अपर मुख्य सचिव आराधना शुक्ला ने इस बारे में जारी आदेश में कहा है कि अनलॉक-2 में सत्र नियमित करने और छात्रों के व्यापक हित में माध्यमिक विद्यालयों में शिक्षकों आदि को 6 जुलाई से बुलाये जाने की अनुमति दी गई है। कोविड-19 के संक्रमण से बचाव के लिए विद्यालय भवन, फर्नीचर आदि को रोज पूर्णत: सैनिटाइज करना होगा। प्रवेश से पहले थर्मल स्कैनिंग की जाए। तापमान सामान्य से अधिक होने पर विद्यालय में प्रवेश न दिया जाए तथा इसकी सूचना सीएमओ को दी जाए। 

उन्होंने कहा है कि अभिभावक संघ की जल्दी बैठक बुलाकर उन्हें ऑनलाइन पढ़ाई की व्यवस्था की जानकारी दी जाए। अधिकारियों, प्रधानाचार्यों, शिक्षकों और विद्यार्थियों को ऑनलाइन प्रशिक्षण की व्यवस्था की जाए। प्रत्येक कक्षा के लिए प्रतिदिन कक्षावार व विषयवार समय सारिणी बना कर अधिकतम 15 जुलाई तक ऑनलाइन पढ़ाई प्रारम्भ कर दी जाए। लॉक डाउन की अवधि में परिवहन शुल्क न लिये जाने और शैक्षणिक सत्र 2020-21 के लिए शुल्क वृद्धि न किये जाने संबंधी शासनादेश का अनुपालन सुनिश्चित किया जाए।

श्रीमती शुक्ला ने कहा है कि शुल्क जमा न करने के कारण किसी छात्र को ऑनलाइन पठन-पाठन से वंचित न किया जाए और न ही इस आधार पर किसी छात्र का नाम विद्यालय से काटा जाए।

Sunday, July 5, 2020

सऊदी अरब के दैनिक अखबार में सिस्तानी साहब का अपमान बर्दाश्त नहीं।

फ़ार्स इंटरनेशनल न्यूज़ एजेंसी के अनुसार, लंदन स्थित सऊदी अख़बार अशरक-अल-अस्वत(asharq al awsat) ने शुक्रवार को अयातुल्ला सिस्तानी साहब का अपमानजनक स्केच प्रकाशित किया, जिसकी वजह से इराक के लोगों में गुस्सा है।
 इराक़ के संसदीय मोर्चे के प्रमुख हादी अल-अमीरी ने सऊदी अख़बार के माध्यम से जो आयतुल्लाह सिस्तानी साहब का अपमान किया है उसकी निंदा की है।
और इराक़ी संसद के सदस्य अहमद अल-असदी ने भी अपमान की निंदा की है   और उन्होंने दैनिक अखबार को सऊदीअरबिया, अमरीका और इसराइल का पिट्ठू बताया है।
सऊदी अरब के दैनिक अखबार के जरिए आयतुल्लाह सिस्तानी साहब का अपमानजनक चित्र बनाना सऊदी अरब, अमेरिका और इजरायल की मानसिकता को दर्शाता है।

File Photo

भारत और पाकिस्तान के बीच एक दूसरे के क़ैदियों की लिस्ट का आदान-प्रदान हुआ।

दोनों देशों ने एक-दूसरे के नागरिक कैदियों की सूची सौंपी।

 रेडियो पाकिस्तान के अनुसार, देश के विदेश मंत्रालय ने कहा कि पाकिस्तान में 324 भारतीय कैदी हैं, जिनमें 54 नागरिक और 270 मछुआरे शामिल हैं।  इन लोगों को पाकिस्तान की समुद्री सीमाओं का उल्लंघन करने के लिए कैद किया गया था।

 अखबार के सूत्रों के अनुसार, भारत ने नई दिल्ली में पाकिस्तान के उच्चायोग को एक समान सूची भी सौंपी।  भारत की सूची में 362 पाकिस्तानी कैदी हैं।

 गौरतलब है कि भारत और पाकिस्तान के बीच 21 मई, 2008 को कॉन्सुलर एक्सेस समझौते के तहत दोनों पड़ोसी देश एक वर्ष में दो बार कैदियों की सूची एक-दूसरे को सौंपते हैं।  दोनों देश एक-दूसरे को हर साल 1 जनवरी और 1 जुलाई को कैदियों की सूची सौंपते हैं।

 गौरतलब है कि दोनों देश आमतौर पर कैदियों की सूची के आदान-प्रदान के कुछ दिनों बाद एक-दूसरे के बंदी मछुआरों को रिहा कर देते हैं।

Monday, March 23, 2020

Video Report - मुफ्ती अब्दुल रहमान कासमी साहब नौगावां सादात द्वारा कोरोना वायरस की अफवाहों को रोकने के लिए जारी की गई अपील

मुफ्ती अब्दुल रहमान कासमी साहब नौगावां सादात द्वारा कोरोना वायरस की अफवाहों को रोकने के लिए जारी की गई अपील #corona #virus

PLEASE सब्सक्राइब आवर YouTube चैनल

Sunday, March 22, 2020

Video Report कोरोना वायरस की रोकथाम के लिए उपाय न किए जाने से भाजपा के नेता ने नगर पंचायत नौगांवा सादात को सुनाई खरी खरी।

कोरोना वायरस की रोकथाम के लिए उपाय न किए जाने से भाजपा के नेता ने नगर पंचायत नौगांवा सादात को सुनाई खरी खरी। भाजपा नेता गुलाम अब्बास

Saturday, March 21, 2020

सिविल सेवा परीक्षा 2021 के लिए नि: शुल्क कोचिंग - शिया नौजवानों के लिए एक अच्छा मौका।

अहले-बैत ट्रस्ट, मुंबई सिविल सेवा परीक्षा 2021 के लिए फ्री कोचिंग सेंटर चलाए जाने की शुरुआत की जा रही है। जो नौजवान सिविल्स परीक्षा में भाग लेना चाहते हैं वह नौजवान नीचे दी हुई वेबसाइट पर क्लिक करें और अपने फॉर्म को भरे।
अधिक जानकारी के लिए यहां क्लिक करें। Coaching Prospectus

Thursday, March 19, 2020

कोरोना वायरस। क्या नगर पंचायत किसी अनहोनी का इंतजार कर रही है? नौगांवा सादात।

क्या नगर पंचायत किसी अनहोनी का इंतजार कर रही है? नौगांवा सादात।
आखिर नगर पंचायत नौगांवा सादाद ने कोरोना वायरस की रोकथाम के लिए जागरूकता के लिए क्या कदम उठाए हैं?
चेयरमैन के पति से जब फोन पर बात की गई कोरोना वायरस के संबंध में तो उनहोने बताया कि इस संबंध में कोई भी तक आधिकारिक रूप पर रूप से कोई बैठक आयोजित नहीं की गई है।
वीडियो  देखने के लिए यहां पर क्लिक करें।




करोना वायरस के संबंध में मिजाने हक सोसाइटी ने उप जिलाधिकारी को 5 मार्च 2020 को एक पत्र दिया था।

Tuesday, March 10, 2020

होली के मौक़े पर मस्जिद को ही ढक दिया गया! । UP News


उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ के संवेदनशील क्षेत्र में होली के मद्देनज़र सुरक्षा का हवाला देकर पुलिस प्रशासन ने एक मस्जिद को पूरी तरह ढक दिया।


प्राप्त रिपोर्ट के मुताबिक़, भारत के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश पुलिस का कहना है कि शांति व्‍यवस्‍था बनाए रखने के लिए अलीगढ़ के संवेदनशील अब्दुल करीम चौराहे पर स्थित हलवाइयां नामक मस्जिद को शामियाना और तिरपाल से ढक दिया है, ताकि होली के दौरान मस्जिद पर कोई रंग ना फेंक दे। पुलिस प्रशासन ने कथित रूप से शांति बनाए रखने के लिए अलीगढ़ के संवेदनशील अब्दुल करीम चौराहा के पास हलवाइयां मस्जिद को शामियाना और तिरपाल से ढक दिया गया है ताकि होली के दौरान कोई मस्जिद पर रंग न डाल दे।
अलीगढ़ के पुलिस अधीक्षक (एसपी) अभिषेक ने कहा, ‘यह इलाक़ा संवेदनशील है इसलिए सब्ज़ी मंडी चौराहे की मस्जिद हलवाइयां को एहतियातन ढका गया है ताकि क्षेत्र में सांप्रदायिक सद्भाव बनाए रखा जा सके।’ एसपी अभिषेक ने कहा कि स्थानीय प्रतिनिधि से चर्चा के बाद यह फ़ैसला लिया गया है। उन्होंने कहा, ‘हमने कई एहतियातन उपाय किए हैं। इलाक़े में रैपिड एक्शन फोर्स और स्थानीय पुलिस गश्त करे रही है और क्षेत्र के घरों की छत पर ड्रोन नज़र रख रहे हैं। होली समारोह के दौरान संवेदनशील क्षेत्रों में पर्याप्त बल तैनात किए जाएंगे।’
अलीगढ़ के पुलिस अधीक्षक ने बताया, ‘होली पर इलाक़े में शांति व्यवस्था स्थापित करने के लिए 5,000 लोगों को नोटिस जारी किए गए हैं। आरएएफ़ के साथ स्थानीय पुलिस लगातार पेट्रोलिंग कर रही है। वहीं, ड्रोन कैमरे से घरों की छतों की भी निगरानी की जा रही है। इस बात की छानबीन की जा रही है कि छतों पर संवेदनशील वस्‍तु तो नहीं है।’ इस बीच कई समाजिक एवं राजनीतिक हस्तियों ने यूपी सरकार पर लगातार मुसलमानों को प्रताड़ित करने का आरोप लगाया है। इन सभी लोगों का कहना है कि योगी आदित्यानाथ जबसे उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने हैं तब से वे इस प्रदेश के मुसलमानों के ख़िलाफ़ कोई न कोई फ़ैसले ले रहे हैं और कोई भी मौक़ा नहीं छोड़ते जब वह मुस्लिम समाज की धार्मिक आज़ादी को छीनने का प्रयास न करते हों। ANI

ALI DAY (13 RAJAB) 2020 नौगांवा सादात अली डे मनाया गया। वीडियो फोटो रिपोर्ट।









Thursday, March 5, 2020

। नौगांवा सादात। कोरोना वायरस की रोकथाम के लिए SDM को "मिजाने हक सोसाइटी" ने ज्ञापन सौंपा।


मिजाने हक वेलफेयर सोसाइटी जो के स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में निरंतर काम करती रही है। इस संबंध में एक कदम और आगे बढ़ाते हुए कोरोना वायरस के संबंध में एक ज्ञापन उप जिला अधिकारी तहसील नौगावां सादात को दिया है। जिसमें तहसील नौगांवा सादात के सभी क्षेत्रों शहर नगर गांव देहात में इस खतरनाक बीमारी की रोकथाम के लिए प्रभावशीलता दम उठाए जाने की अपील की है।
विज्ञापन देने में इस मौके पर मिजाने हक वेलफेयर सोसाइटी के अध्यक्ष रियाज अब्बास आब्दी,कोषाध्यक्ष गुलशन अली,
महासचिव एजाज अब्बास, डॉक्टर दानिश अब्बास, हेमंत यादव , नदीम असगर,आबिद और गुलरेज आदि मौजूद रहे।




Monday, February 24, 2020

नौगांवा नगर पंचायत सो रही है आम जनता परेशान है। AMH

केंद्र सरकार एवं राज्य सरकार समय-समय पर सड़कों को दुरुस्त करने के लिए बजट पास करती है तो वहीं पर नौगांवा सादात के एक मोहल्ला गुला तालाब पर सड़क का यह हाल है कि वहां पर पानी भरा हुआ है

नगर वासियों का कहना है कि नगर पंचायत में कई बार शिकायत करने के बाद भी इस समस्या का हल नहीं हुआ है

नगर वासियों का कहना है कि इस पानी भरे होने की वजह से हमें बहुत सारी समस्याओं का सामना करना पड़ता है।

नगरवासी इस सड़क के फोटो को सोशल मीडिया पर वायरल कर रहे हैं ताकि उच्च अधिकारी इस पर उचित कार्यवाही कर सकें।


एक सामाजिक संगठन मिजाने हक सोसाइटी  का कहना है कि   यह नौगांवा सादात  के एक मोहल्ले की तस्वीर है जहां पर नौगांवा सादात के विकास और स्वच्छ भारत अभियान की सच्चाई और नगर पंचायत की सोती हुई नीद  को जगाने के लिए यह फोटो काफी है।

मिजाने हक वेलफेयर सोसाइटी ने कहा कि हम नगर पंचायत नौगांवा सादात की निंदा करते है।

मिजाने हक वेलफेयर सोसाइटी इन फोटो के साथ एक शिकायत पत्र जिला अधिकारी को भेजने वाली है ताकि जिन लोगों की यह लापरवाही है उन पर कार्यवाही की जा सके।
नगर पंचायत नौगांवा सादात को शर्म आनी चाहिए सभासदों को शर्म आनी चाहिए के नगर में ऐसी स्थिति है। नगर पंचायत की जवाबदेही बनती है कि इसका जिम्मेदार कौन है? क्या सभासद जिम्मेदार हैं चेयरमैन जिम्मेदार है या इसका ठेकेदार जिसने सड़क बनाने का ठेका लिया था? Nowgawn Sadat

Friday, December 6, 2019

1240 रुपए हर कर्मचारी से हर महीने चेयरमैन लेकर खाता है। नगर पंचायत नौगांवा सादात।

1240 रुपए हर कर्मचारी से हर महीने चेयरमैन लेकर
खाता  है। नगर पंचायत नौगांवा सादात।

स्वच्छ भारत अभियान की धज्जियां उड़ाई जा रही है।
सफाई कर्मचारी हड़ताल पर।सफाई कर्मचारियों का वेतन 9240 पर दिए जाते हैं केवल ₹8000 नगर पंचायत नौगांवा सादात। 
plese watch vedio
1240 रुपए हर कर्मचारी से हर महीने चेयरमैन लेकर खाता है। नगर पंचायत नौगांवा सादात।

Thursday, April 19, 2018

आवश्यक घोषणा - “मारेफ़त” हज़रत इमाम महदी अलैहिस्सलाम कि आल इण्डिया लिखित प्रतियोगिता

आवश्यक घोषणा
आल इण्डिया लिखित प्रतियोगिता मारेफ़त हज़रत इमाम महदी   अलैहिस्सलाम
हज़रत इमाम महदी (अलैहिस्सलाम) के योमे मिलादत के मोके पर हज़रत इमाम महदी (अलैहिस्सलाम) की हयाते मुक़दस से मुतालिक मालूमात पर प्रशन पत्र के माध्यम से लिखित प्रतियोगिता (भाषा - हिंदी/ उर्दू) का आयोजन किया गया है
प्रतियोगिता में चुने हुए व्यक्तियों को प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया जाएगा
प्रश्न पत्र हासिल करने के लिए संपर्क करें+91 9548347297Email Id: office.mizanehaq@gmail.com 
या प्रश्न पत्र हासिल करने के लिए यहाँ क्लिक करें
उत्तर कापी जमा करने की तारीख 15 शाबान 1439 है
आयोजक मिज़ाने हक वेलफेयर सोसाइटी नौगावा सादात जिला अमरोहा, भारत
ضروری اعلان
ہندوستان میں حضرت  امام زمانہ  عجل اللہ فرجہ الشریف کی پر نور ولادت کے موقح پر "کل ہند تحریری مقابلہ" (اردو /ہندیعنوان "معرفت حضرت  امام عصر عجل اللہ تعا لی"آپکی حیات مقدس سے متعلق معلومات پر سوال نامہ کے ذریعہ تحریری مقابلہ رکھا گیا ہے
جوابات کی کاپی  جمع کرنے کی آخری تاریخ 15 شعبان المعظم 1439ھ  ہے
مقابلہ میں منتخب اشخاص کو تو سیفی سند سے سر فراز کیا جائے گا
سوال نامہ حاصل کرنے کے لئے رابطہ کریں +91 9548347297
                                                                  Email Id: office.mizanehaq@gmail.com 
زیرانتظاممیزان حق فلاح و بہبود سوسائٹی



"शाही खाना" बासमती चावल, बिरयानी चावल Naugawan City Center (NCC) (नौगावा सिटी सेंटर) पर मुनासिब दामों पर मिल रहे हैं।

White Shahi Khana Basmati Rice, Plastic Bag,  ₹ 75 / kg  शाही खाना बासमती चावल, NOORE JANNAT, GLAXY,NWAZISH बिरयानी चावल  Naugawan City Cent...